Thursday, 2 May 2013


कर्म का फल

 

 

मिलता  हर  इंसान को,

अपने कर्म का फल,किसी,

को जल्दी,किसी को बाद में,

मजा चखाते उसके कर्म ।

 

अच्छे हों या बुरे कर्म,

लौट के आते जरूर हैं,

अच्छे का फल अच्छा होता,

गलत से मिलता कष्ट है ।

 

उपदेश दिया है कृष्ण ने,

गीता का आधार यही,

समय रहते सबक सीख लें,

देर न हो जाए,वरना कहीं ।

 

तीन बंदर का संदेश यही,

बताया है गांधी बाबा ने,

वक्त निकाल थोड़ा सोचो,

कभी मिलेगा कष्ट नहीं ।

 

दुख किसी को दो नहीं,

न करो ढोंग पाखंड ही,

तन मन को निर्मल कर,

सुमिरन करो हरि चरणों की ।

 

कर्म करो ऐसे जीवन में,

प्रभु प्रसन्न हो जायें,गर्व,

करें, अपने  अंश पर,

मुक्त आत्मा तुम्हें बनायें ।

 

 

 

देवत्व के अधिकारी  हो,

प्रभु के सच्चे सपूत हो,

मिला है जिस हेतु जीवन,

उसको तुम सफल करो ।

 

बहुत कष्ट में है डूबी,

अपनी भारत माता,उसके,

बच्चों के कष्ट मिटाकर,

कर दो चिंता मुक्त उसे ।

  

 

Friday, 26 April 2013

सरकारी नौकरी


सरकारी नौकरी

 

 

काश दो दिन दफ़्तर लगता ,

होती छुट्टी पाँच दिन,

खाते खेलते,सोते घर में

मौज मनाते पाँच दिन ।

 

बच्चे रोते भाग्य पर,

पर पत्नी खुश हो जाती,

हाथ बटाएगा काम में,

यह सोच मंद मुस्कुराती।

 

आ जाती तनख्वाह एक को,

बन जाता काम महीने का,

तान रज़ाई ,लेता खर्राटा,

जय बोलता सरकार की ।

 

जाता दफ़्तर सोम- मंगल,

बाँकी दिन अपने हो जाते,

तेल मालिश करता घर पर,

वोट देता सरकार को ।

 

समय काटता दिन भर घर पर,

ऑफिस का काम भी कर देता ,

त्याग दिखाता जीवन में मैं,

मुफ्त की तनख्वाह न खाता ।

 

कब आएगा समय ऐसा,

इसी का इंतजार है,

आ जाए अगर मुद्दा चुनाव में,

2014 अमर हो जाता ।

 

 

 

 

स्वस्थ होगा मानव तभी,

भरपूर नीद जब सोयेगा,

काम के बोझ से मुक्त होकर,

खुशहाल जीवन, जब जिएगा ।

 

बाबा ऐसे ही करते थे,

दो महीने में दफ़्तर जाते थे,

लेकर आते जब मोटी तनख्वाह,

नौकरी की बात तब हम जाने थे ।

 

आजादी बाद हुआ था ऐसा,

मजा किए थे लोग सब,

हुई कड़ाई नब्बे के बाद ,

मस्ती में पड़ी खड़ास रे ।

 

प्रतिभाशाली लोग आ गए,

मेहनत ये करते बहुत,

विध्न बने है,हमारे सुख के,

भाग्य हुआ विपरीत रे ।

 

राज्यों में होता है ऐसे,

जाते दफ़्तर एक दिन,

टूर बनाकर घूमा करते,

मजा मारते तीस दिन ।

 

हुई कड़ाई वहाँ भी अब,पर,

जाकर दफ़्तर में सोते हैं,

रौब दिखाते पत्नी पर,

कि कर आया मैं काम रे ।

Tuesday, 23 April 2013

तबादला


तबादला

 

 

तबादला कोई  खौफ नहीं,

बल्कि नियमित घटना है,

रहो सदा तैयार इसके लिए,

यह नौकरी का हिस्सा है ।

 

कभी पसंद का,तो कभी मुश्किल का होता है,

कभी सुख तो कभी दुख देता है,

परिवर्तन संसार का नियम है यारो,

तबादले को खुशी से अपनालों यारो ।

 

बेमौसम तबादले तकलीफ़ देते हैं,

पत्नी बच्चों को परेशान करते हैं,

पर कट जाता है समय धीरे-धीरे,

थोड़ा संघर्ष सिखाते हैं तबादले ।

 

जरूरी नहीं की अपनी चाहत फले,

जिद नुकसान दे सकती है,

क्या छिपा है भविष्य गर्त में,

इसको तुम  जानते नहीं ।

 

मजबूरी में,विनम्रता से निवेदन करो,

पर मत गिड्गिड़ाओ किसी से,

इज्जत  स्वाभिमान से बड़ा,

नहीं हो सकता, कोई तबादला ।

 

समस्या है सबके जीवन में,

इस बात को  समझा करो,

बिना वजह हर तबादले में,

बॉस के सामने मत रोया करो ।

 

 

 

 

 

खुश होकर जाओ, इधर-उधर,

कुछ नया दिखेगा हर जगह,

जिंदगी भर एक जगह रहकर,

खूँटे से तुम, मत  बधे रहो ।

 

कुछ दुष्टों के लिए, यह व्यापार है,

न बनने दो खुद को इसका हिस्सा,

छोड़ दो  अपने को भगवान पर,

हो जाएगा,मनमुताबिक तबादला ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Tuesday, 16 April 2013


भूत को क्यों याद करूँ(मेरी पुस्तक जीवन संघर्ष से )

 

 

 

क्यों याद करूँ भूत को,

क्या दिया,

क्या सोचा था मेरे बारे में,

क्या रखा था भविष्य के लिए,

क्या अच्छा किया की,भूत को,

मैं याद करूँ ।

 

देखूंगा अपने भविष्य को,

सोचूंगा अपने भविष्य को,

कर्म करूँगा भविष्य के लिए,

संघर्ष करूँगा जीवन में,

सफल बनूँगा भविष्य में,भूत को क्यों,

मैं याद करूँ ।

 

छिपा होता है सब,

भविष्य की गर्त में ,

होगा वही जो भाग्य में लिखा है,

पर कर्म से बदल सकता है भाग्य,

कर्म पर ध्यान दूँगा,भूत को क्यों,

मैं याद करूँ ।

 

जो हुआ ,अच्छा हुआ,

जो हो रहा है,अच्छा हो रहा है,

जो होगा,अच्छा ही होगा,

श्रीकृष्ण का उपदेश है ये,

जब गीता है मेरे पास तो,भूत को क्यों,

मैं याद करूँ ।

 

 

 

 

 

 

 

हमारे चाहने से जब,

काम बनेगा नहीं,तब,

समझूँगा ईश्वर की मर्जी है,

कर्म करूँगा,सब ईश्वर पर छोडकर,

मिलेगा फल बाद में,पर भूत को क्यों,

मैं याद करूँ ।

 

भूत को याद कर क्यों,

काँटा बिछाऊँ,भविष्य पथ पर,

भीग जाऊँ अश्रुधारा में,

गुम हो जाऊँ निर्जन वन में,

प्रकाश को देखूंगा,क्यों भूत को,

मैं याद करूँ ।

 

क्या है भूत के पास,भविष्य के लिए,

क्या सांत्वना है भविष्य के लिए,

क्यों विश्वास करूँ,झूठे भूत पर,

क्यों फंसू,इसके मायाजाल में ,

अनुभव की मर्यादा याद कर,क्यों भूत को,

मैं याद करूँ ।

 

स्वार्थ मेरे अंदर था नहीं,

निःस्वार्थ सत्य खोज रहा था,

ज्वार भाटे के कटु थपेड़ों से,

जीवन सत्य का दीदार किया,

अब भूत को फिर क्यों,

मैं याद करूँ ।

 

 

Sunday, 14 April 2013


भगवान पर विश्वास(जीवन संघर्ष पुस्तक से )

 

 

तैयार हो कष्ट सहने के लिए,

तैयार हो संतुस्ठ रहने के लिए,

तैयार हो पिस जाने के लिए,

तैयार हो महत्वाकांक्षा मारने के लिए,

तो भगवान पर विश्वास करो ।

 

तैयार हो अपने में मस्त रहने के लिए,

तैयार हो दूसरी दुनिया में जीने के लिए,

तैयार हो अपमान सहने के लिए,

तैयार हो अकेले जीने के लिए,

तो भगवान पर विश्वास करो ।

 

तैयार हो जो मिला उसी में गर्व के लिए,

तैयार हो प्रार्थना में ही भरोसे के लिए,

तैयार हो मायामोह,मुक्ति में विश्वास के लिए,

तैयार हो निरीह बनकर जीने के लिए,

तो भगवान में विश्वास करो ।

 

तैयार हो भूंखे भी सुखी रहने के लिए,

तैयार हो मार खाने में मुस्कुराने के लिए,

तैयार हो साँस चलाने में सहारा के लिए,

तैयार हो अपनों को दीन देखने के लिए,

तो भगवान पर विश्वास करो ।

 

तैयार हो आँसू पी जाने के लिए,

तैयार हो तड़पने के लिए,

तैयार हो धैर्यशील बनने के लिए,

तैयार हो अग्निपथ पर चलने के लिए,

तो भगवान पर विश्वास करो ।

 

 

 

 

करो विश्वास भगवान में,पर,

पहले खुद पर विश्वास करो,

मजबूत  करो बाजुओं  को,

जीवन संघर्ष में, डटे रहो ।

 

विश्वास होगा अपने पर,भगवान,

पर विश्वास कर पाओगे तभी,

मेहनत करोगे, लड़ोगे  जब,

भगवान मदद करेगा तभी ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Friday, 12 April 2013


इंतजार

 

 

व्यथित करता है,अधीर बनाता है,

खुशी के इंतजार में,दुखी करता है,

यही है जीवन और समय का खेल,

दुख सुख के मिलने,बिछुड्ने का खेल ।

 

प्रेम बढ़ाता है, मिठास घोलता है,

अपनों के करीब और ला देता है,

प्रयास की थकावट को बढ़ाता है,

सफलता के बाद नया लक्ष्य देता है।

 

समय को बढ़ाता,घटाता है इंतजार,

प्रेम को असीम बनाता है इंतजार,

कभी-कभी थका डालता है इंतजार,

जीवन की साँस को चलाता है इंतजार ।

 

धैर्य,शक्ति का मित्र है इंतजार,

क्रोध अधीरता का शत्रु है इंतजार,

जीव-जन्तु ,मनुस्य सभी करते हैं इंतजार,

भगवान को भी नहीं छोड़ा इंतजार ।

 

 

Wednesday, 10 April 2013


जन सेवा

 

 

देख  गरीबी  भारत की,

फफक फफक मैं रो पड़ा,

क्यों अभिमान करूँ अपने पर,

अपने से ही , पूंछ पड़ा ।

 

शर्म नहीं आती क्यों उसको,

बड़ा आदमी कहता जो खुद को,

कोई बड़ा नहीं इस जग में,

परहित नहीं हैं,यदि कर्म में ।

 

लग जाओ, देश सेवा में,

उठो अभी,मत करो देरी,

खिल जाएगा जीवन नभ पर,

पूज्यनीय बन जाओगे ।

 

कष्टों  को अंगीकार करो,

अपने को तुम मजबूत करो,

केवल एक प्रभू की सत्ता,

ऐसा समझ,तुम काम करो ।

 

जन सेवा ही प्रभु सेवा है,

रहे ध्यान  इसका  सदा,

जुट जाओ,डट जाओ इसमें,

अमरत्व की प्राप्ति करो ।

 

अपने सपने को भी तुम,

मेहनत कर साकार करो,

कुछ कर लेने के बाद ही,

जनसेवा पर काम करो ।

 

 

 

कोई नहीं पूंछता उसको,

है पद ज्ञान से हीन जो,

पहले बनो खुद मजबूत,

फिर सबकी सेवा करो ।

 

रखो नियंत्रण लालच पर,

जरूरत का ही ध्यान करो,

करके मन और तन प्रसन्न,

जग का तुम कल्याण करो ।

 

हैं अमर पूर्वज तुम्हारे,

रहे ध्यान इस बात का,

जन सेवा के द्वारा तुम भी,

अमरत्व को प्राप्ति करो ।